Friday, December 10, 2010

वक्त

वक्त तो उड़ गया तितलियों की तरह,
बाग से फूल खुशबू चुराते रहे,
क्यारियों के किनारे बनी मेंड़ पर,
चन्द भँवरे सदा गुनगुनाते रहे||

शाम भी चाँद की डोर ले हाथ में,
रात की ओर धीरे से जाती रही,
जो कभी साथ अपने थी इस मोड़ पर,
हमको वो ज़िन्दगी याद आती रही||

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